सोशल मीडिया ओर मेट्रो सिटी का अकेलापन
अचानक दिमाग में आया कि देखना दुनिया में कितने लोग ऐसे हैं जो मुझे जानते हैं ओर मैं भी उनको जानती हूं। मेरे ऑफिस के सहकर्मियों और पूरे भारत में ऑफिस के मेरी जन पहचान के सहयोगियों की संख्या 1000 है! फिर कुछ सोशल मीडिया पर कुछ कॉलेज ओर यूनिवर्सिटी के लोग कुछ घर परिवार के। तो कुल जानने वालों की संख्या हो गई लगभग ५००० जो एक एक बहुत बड़ी संख्या है! पर क्या आपके नेटवर्क में इतने सारे लोग होना वास्तव में प्रभावशाली है! आजकल, हमारे पास सोशल मीडिया और अन्य तकनीकी साधनों के माध्यम से दुनिया भर में लोगों से जुड़ने के कई अवसर हैं। लेकिन फिर भी, हम अक्सर अकेलेपन की भावना का अनुभव करते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं: 1. सोशल मीडिया की असली दुनिया से अलग दुनिया: सोशल मीडिया पर हमारे द्वारा बनाए गए संबंध अक्सर असली दुनिया के संबंधों से अलग होते हैं। हमारे सोशल मीडिया पर दोस्त और अनुयायी हो सकते हैं, लेकिन वे हमारे साथ व्यक्तिगत संबंध नहीं बना सकते हैं। 2. व्यक्तिगत संबंधों की कमी: आजकल, हम अक्सर अपने व्यक्तिगत संबंधों को बनाने और बनाए रखने के लिए समय नहीं देते हैं। ...