aaine me dekhna hai tumhe
तुम्हारी नाराजगी अब अच्छी नहीं लग रही न तुम्हारा लापता होना अगर तुम सच में मेरी जिंदगी हो मेरी हर यात्रा का आखिरी पड़ाव ओर वो मुकम्मल जहां जिसके लिए ये शब्दों का भटकना शुरू हुआ तुम्हे अब सामने आ जाना चाहिए जिंदगी बिल्कुल अपने सारी परछाइयों के साथ ये धुंधला सा अक्स अब आईने में साथ हो तो अच्छा हो वरना न हो तो अच्छा@gunjanpriya.blogspot.com