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आखिरी जिद

तुमसे प्यार करना भी बड़ी बेकार जिद निकली उड़ते गए मजाक तुम लैला मजनू शहरी फरहाद का और हम यूं ही लटके रहे अधर में  कभी तो तुम्हे भी सच्चा प्यार होगा वक्त बेवक्त तुम्हारे अचानक और बेहिसाब बरसते जज़्बात  कन्फ्यूज करते रहे खुद ही खुद हम कयास लगाए गए  इतने अच्छे तो लोग प्यार में ही हो सकते हैं  हालांकि तुमने कहा था इतना अच्छा तो मैं सबके लिए हूं ये रिलेशनशिप कभी सिचुएशनशिप से आगे बढ़ी ही नही  मगर जब भी तुम्हे अहसास हुआ दूरी का अचानक से फिर आ दबोचा अपने खूबसूरत शब्दों में  सवालों का जवाब नही था तुम्हारे पास  सौ सौ सवाल फिर भी हमसे ही करते गए और हम तुम्हारे हर इनकार में कोई दबा छुपा सा जवाब ढूंढते रह गए तुम सही थे यहां तुम्हारी कोई गलती नही थी। इतने अच्छे तो तुम सबके लिए थे शायद इतने करीब भी सबके लिए थे  बस हमारी सोच गलत थी कि  उन सब में कुछ खास रहे होंगे हम या सिर्फ हम ही रहे होंगे हम  ये भी आखिरी था सबके लिए अच्छा बनने की तुम्हारी आदत से कन्फ्यूज होना और ये आखिरी था खुद को तुम्हारी जिंदगी में शामिल होने का भ्रम रखना 

चुपके चुपके मत जाओ

चुपके चुपके मत जाओ इस तरह कोई जाता है साथ दिया है साथ निभाते देर से मिले थे फिर भी पास तो आते यूं इस तरह से गायब हो जाना फिर अचानक से आना  और बहुत करीब आ जाना थाम कर हाथ नए वादे बनाना और फिर ख्वाबों का टूट जाना  टूटे ख्वाब ही सही हमने मिल कर तो देखा था जीत कर दिल दुबारा अब दर्द मत दे जाओ जाना ही है तो कह कर जाओ बस ऐसे चुपके चुपके मत जाओ

इश्क में ये भी सीख लिया

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इकतरफा इश्क में भी  बहुत कुछ सीख लेते हैं लोग किसी के माशूक को चाय की तलब थी  तो चाय से इश्क कर लिया किसी को बारिश पसंद थी तो जनाब चातक हो गए  और ताकते रहे स्वाति नक्षत्र की उस बूंद को  जो सीपी में मोती बना दे इंतजार की धूप में तपती मरुभूमि बन गए  और एक जरा नजर इनायत हुई कि आषाढ़ के बादल से फट पड़े और जब आवाज सुनी तो बस पागल ही हो गए  ये जुनून भी मगर फकत बातों का है उनको मालूम कहां कोई इतना भी तन्हा है