फ्रेश है क्या

तुम्हारे बिस्तर की सिलवटें
तकिए पर तुम्हारी बाहों के दवाब का निशान
जूते पहनते वक्त जरा सी टेढ़ी की हुई कुर्सी
हाथ पोछकर ऐसे ही छोड़ दिया तौलिया
ओर जाते जाते छोड़ी जूठे कप में वो थोड़ी सी चाय....
 
शायद कई दिनों तक यूँही पड़े रहेंगे 
जानबूझ कर अनछुई, बिना धुली 
आते जाते ड्राइंग रूम तक हम उन्हें देखेंगे
जैसे तुम अभी अभी गए हो
शायद दिनों, हफ्तों ओर महीनों तक....
जब तक तुम्हारे दुबारा आने से पहले वो बदल न दिए जाएं

फिर भी जब भी आते हो पूछते हो
फ्रेश है क्या ...???

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