तुम्हारे शहर का पता नहीं है मेरे पास

तुम्हारे शहर का पता नहीं है मेरे पास
मैं अमृता प्रीतम नहीं 
कि उम्र की सारी चिट्ठियां उस शहर को लिखूं 
जिसका पता ही मेरे पास नहीं
तुम्हे लौटना हो तो दरवाजे खोल कर कदम बढ़ाना होगा
ओर अगर सामने वाले का इंतजार कर रहे 
किसी बेवकूफ शुतुरमुर्ग की तरह 
तुम्हे याद दिखाया जाए कि दरवाजे तुम्हारी तरफ से बंद हैं
उफ्फ इंसान इश्क के अलावा भी कोई बेवकूफी कर सकता है क्या 
यकीन नहीं होता 

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