दूध ओर रोटी

दूध ओर रोटी,
कुत्ता ओर मजदूर,
ज्यादा फर्क कहां है इनमें! 
कुत्ता -------
व्यक्ति की शान माना जाता
जिसे गोद में उठाए चलते हैं लोग
उसकी आंखों की चमक में 
खोजते हैं अपना वैभव
ओर करते हैं इसके सहारे 
अपनी विलासिता का प्रदर्शन! 
कुत्ता ----------
दूध का उपभोक्ता है
स्तर की पहचान देता है
कार में बैठा रहता है दम दबा कर....
और रोटी-------???
खुराक एक मजदूर की
भूख से बिलबिलाए पिचके पेट
पपोले होठों पर जीभ फेरते 
गड्ढे में धंसी आंखे जिसकी
चमक उठती हैं
----------- रोटी देखकर !
जिसे पाने की आशा में चल पड़ता है
गिरती पड़ती बोरी को पीठ पर सम्हाले
मज़दूर....!

मजदूर --------
जिसके साथ बंधी होती है
बच्चों की तड़प
महीने भर से रोके हुए है अपने हाथों को
नहीं फैलाते किसी के सामने उन्हें
भूख मिटाने को
निहारते हैं स्वाभिमानी बच्चे 
बोझ उठाते दूर जाते हुए अपने मजदूर पिता को
मांगते नहीं किसी से भीख रोटी की खोज में !

रोटी ---------
स्वप्न है उनका
सौंदर्य, मान ओर
 चिथड़े में झलकता स्वाभिमान भी

सचमुच फर्क है दूध ओर रोटी में 
बहुत बहुत फर्क है....

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