कलम ही साथी अब
मुझे लगता है मेरे अंदर बहुत खालीपन है
जो किसी के आने जाने से नहीं भरता
बहुत सारे शब्द
उस खाली महल में गूंजते रहते हैं
दीवारों से टकरा टकरा कर
शब्द जिन्हें वाक्य में बदलने की जरूरत है
वाक्य जो कहानियां बन कर
किसी के पास जाना चाहते हैं
तो क्या हुआ
हर एक दस्तक उन कहानियों के लिए न हो
कलम ही सही
सुनेगी सब ओर पहुंचाएगी भी
दूर बैठे किसी अजनबी तक
जिसके खालीपन को भरने को
मेरे शब्दों की जरूरत हो
तो चलो वापस
उन कहानियों की तरफ जो तुम्हे
मुझसे सुननी है
ओर मुझे
सिर्फ तुम्हारे लिए कहनी है
कलम तुम हथियार नहीं सफ़ीना हो
इस सफर ओर हर अगले सफर की साथी
मेरी कलम
मेरी हर कहानी अब तुम्हारी
ओर हर उस अजनबी की जिसे शब्दों की सचमुच जरूरत हो
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