Muddaton baad ghar sa laga tha Kisi ka khayaal Magar khayaal hi tha...@gunjanpriya
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कलम ही साथी अब
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मुझे लगता है मेरे अंदर बहुत खालीपन है जो किसी के आने जाने से नहीं भरता बहुत सारे शब्द उस खाली महल में गूंजते रहते हैं दीवारों से टकरा टकरा कर शब्द जिन्हें वाक्य में बदलने की जरूरत है वाक्य जो कहानियां बन कर किसी के पास जाना चाहते हैं तो क्या हुआ हर एक दस्तक उन कहानियों के लिए न हो कलम ही सही सुनेगी सब ओर पहुंचाएगी भी दूर बैठे किसी अजनबी तक जिसके खालीपन को भरने को मेरे शब्दों की जरूरत हो तो चलो वापस उन कहानियों की तरफ जो तुम्हे मुझसे सुननी है ओर मुझे सिर्फ तुम्हारे लिए कहनी है कलम तुम हथियार नहीं सफ़ीना हो इस सफर ओर हर अगले सफर की साथी मेरी कलम मेरी हर कहानी अब तुम्हारी ओर हर उस अजनबी की जिसे शब्दों की सचमुच जरूरत हो
सपनो का इश्क़
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सपनो का इश्क़ औरतों को इश्क़ चाहिए एकदम मुकम्मल पूरा पैकेज, टॉल डार्क हैंडसम सिंड्रेला सपनो का प्रिंस चार्मिंग यही तो सिखाया जाता है बचपन से कहानियों में, किताबों में मां दादी ओर नानी की बातों में भी ससुराल जाना तो कर लेना मन की अपने घर जाना तो सब मिल जाएगा पर भूल जाती हैं औरते मर्द भी वही आधी अधूरी हकीकत के सपने देख बड़े होते हैं आएगी बीबी तो दिखाना अपने नखरे बीबी आयेगी तो सारे काम करवा लेना अपने ज्यादा बीबी की वकालत करेगा तो जोरू का गुलाम बन जाएगा बीबी को सिर पर मत चढ़ा ओर इस तरह औरत ओर मर्द झूठे फरेब भरे सपनो के बीच झूलते हुए एक ही छत के नीचे बने रहते हैं दो प्रश्नचिन्ह हतप्रभ से जवाब ढूंढते सपनो ओर खौफ के बीच दूरियां जरूरी हैं सोच कभी अपना नहीं पाते सपनो का इश्क़ सिंड्रेला से मिलने से पहले ओर दीवारों के बीच उलझ जाता है किसी कोने में घुट जाती है सिंड्रेला की आवाज
अकेले ही
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मैं हर उस जगह अब घूम आऊंगी जहां जहां ना जाने का मलाल है मुझको जहां जहां जाने के लिए तेरे साथ की जरूरत रही कि तुम कभी फुर्सत से प्लान करोगे कि फिर तुम ये नहीं कहोगे कि मैने अकेले ही देख ली क्यों मैने देख लिया है अब तुम्हारे सपनों में न सेशल्स था कभी न ध्रुवीय रोशनियां न कोलोराडो न ग्रैंड कैनियन न पिरामिड ओर न उगते हुए ओर आधी रात के सूरज ये सब सिर्फ मेरे ही दिमाग का फितूर है मुझे खुद ही नापने है अपने सपनो की मंजिले अकेले ही
बेचारे लड़के क्या करें
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लडके अब नहीं चाहते मा बाप के साथ रहते हुए पढ़ाई करना बाल बनकर शेविंग करके कॉलेज जाना एक शहर में रहकर नौकरी करना मां की कल्पना के अनुसार एक आदर्श बहू ढूंढना वो चाहते हैं साथ पढ़ी लिखी मॉडर्न प्रोग्रेसिव स्त्री जो उनके साथ कदम से कदम मिला कर चल सके ऑफिस, क्लब ओर सड़क पर मगर घर जाने पर घूंघट में मां के पांव छू सके दादी काकी नानी के आशीर्वाद लेने ओर दिल जीतने में माहिर हो जरूरत आने पर दस लोगों का भोजन बनाने में उसके चेहरे पे शिकन न आए मगर बच्चों को पैदा करने सम्हालने ओर स्कूल भेजने में जिम्मेदारी शेयर करने न कहे दोहरी जिम्मेदारियां उठाने का अहसान न जताए क्योंकि नौकरी करना उसका शौक है और बाकी सामाजिक जिम्मेदारियां अनिवार्य लड़की अपने पति की दी हुई स्वतंत्रता का आभारी रहे कि उसने मातृत्व ओर गृह मंत्रालय के साथ अर्थव्यवस्था में भी उसे शामिल होने की स्वतंत्रता दी है बस लड़के समझ नहीं पाते ये पढ़ी लिखी लड़कियां इतना कुछ पाकर भी खुश क्यों नहीं हैं पितृसत्ता के साए में पले बढ़े दुलारे लड़के ये समझ नहीं पाते कि लड़कियां अपना आसमान अलग क्यों ढूंढ रहीं ...