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दूध ओर रोटी

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दूध ओर रोटी, कुत्ता ओर मजदूर, ज्यादा फर्क कहां है इनमें!  कुत्ता ------- व्यक्ति की शान माना जाता जिसे गोद में उठाए चलते हैं लोग उसकी आंखों की चमक में  खोजते हैं अपना वैभव ओर करते हैं इसके सहारे  अपनी विलासिता का प्रदर्शन!  कुत्ता ---------- दूध का उपभोक्ता है स्तर की पहचान देता है कार में बैठा रहता है दम दबा कर.... और रोटी-------??? खुराक एक मजदूर की भूख से बिलबिलाए पिचके पेट पपोले होठों पर जीभ फेरते  गड्ढे में धंसी आंखे जिसकी चमक उठती हैं ----------- रोटी देखकर ! जिसे पाने की आशा में चल पड़ता है गिरती पड़ती बोरी को पीठ पर सम्हाले मज़दूर....! मजदूर -------- जिसके साथ बंधी होती है बच्चों की तड़प महीने भर से रोके हुए है अपने हाथों को नहीं फैलाते किसी के सामने उन्हें भूख मिटाने को निहारते हैं स्वाभिमानी बच्चे  बोझ उठाते दूर जाते हुए अपने मजदूर पिता को मांगते नहीं किसी से भीख रोटी की खोज में ! रोटी --------- स्वप्न है उनका सौंदर्य, मान ओर  चिथड़े में झलकता स्वाभिमान भी सचमुच फर्क है दूध ओर रोटी में  बहुत बहुत फर्क है....
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Muddaton baad ghar sa laga tha Kisi ka khayaal Magar khayaal hi tha...@gunjanpriya

कलम ही साथी अब

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मुझे लगता है मेरे अंदर बहुत खालीपन है जो किसी के आने जाने से नहीं भरता बहुत सारे शब्द उस खाली महल में गूंजते रहते हैं दीवारों से टकरा टकरा कर शब्द जिन्हें वाक्य में बदलने की जरूरत है वाक्य जो कहानियां बन कर  किसी के पास जाना चाहते हैं तो क्या हुआ  हर एक दस्तक उन कहानियों के लिए न हो  कलम ही सही  सुनेगी सब ओर पहुंचाएगी भी दूर बैठे किसी अजनबी तक  जिसके खालीपन को भरने को  मेरे शब्दों की जरूरत हो तो चलो वापस उन कहानियों की तरफ जो तुम्हे  मुझसे सुननी है  ओर मुझे  सिर्फ तुम्हारे लिए कहनी है कलम तुम हथियार नहीं सफ़ीना हो  इस सफर ओर हर अगले सफर की साथी मेरी कलम मेरी हर कहानी अब तुम्हारी ओर हर उस अजनबी की जिसे शब्दों की सचमुच जरूरत हो

सपनो का इश्क़

सपनो का इश्क़  औरतों को इश्क़ चाहिए एकदम मुकम्मल पूरा पैकेज, टॉल डार्क हैंडसम सिंड्रेला सपनो का प्रिंस चार्मिंग   यही तो सिखाया जाता है बचपन से  कहानियों में, किताबों में मां दादी ओर नानी की बातों में भी ससुराल जाना तो कर लेना मन की अपने घर जाना तो सब मिल जाएगा पर भूल जाती हैं औरते  मर्द भी वही आधी अधूरी  हकीकत के सपने देख बड़े होते हैं आएगी बीबी तो दिखाना अपने नखरे बीबी आयेगी तो सारे काम करवा लेना अपने ज्यादा बीबी की वकालत करेगा  तो जोरू का गुलाम बन जाएगा  बीबी को सिर पर मत चढ़ा  ओर इस तरह औरत ओर मर्द  झूठे फरेब भरे सपनो के बीच झूलते हुए एक ही छत के नीचे बने रहते हैं दो प्रश्नचिन्ह हतप्रभ से जवाब ढूंढते सपनो ओर खौफ के बीच दूरियां जरूरी हैं सोच कभी अपना नहीं पाते सपनो का इश्क़ सिंड्रेला से मिलने से पहले   ओर दीवारों के बीच उलझ जाता है किसी कोने में घुट जाती है सिंड्रेला की आवाज

पढ़ी लिखी औरतें

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अकेले ही

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मैं हर उस जगह अब घूम आऊंगी जहां जहां  ना जाने का मलाल है मुझको जहां जहां जाने के लिए  तेरे साथ की जरूरत रही कि तुम कभी फुर्सत से प्लान करोगे कि फिर तुम ये नहीं कहोगे  कि  मैने अकेले ही देख ली क्यों मैने देख लिया है अब तुम्हारे सपनों में न सेशल्स था कभी  न ध्रुवीय रोशनियां  न कोलोराडो न ग्रैंड कैनियन  न पिरामिड ओर  न उगते हुए ओर  आधी रात के सूरज ये सब सिर्फ मेरे ही दिमाग का फितूर है मुझे खुद ही नापने है  अपने सपनो की मंजिले अकेले ही

oh you

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Every sorrow every pain  reminds me of you Oh you... The sea of tears  Your memories bring Then a sigh comes Any pain is less indeed...